मध्यप्रदेश : राष्ट्रीय न्यास का चेयरपर्सन बनने मारू ने की गड़बड़ियां

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भोपाल केंद्रीय मंत्री के नाम पर निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना का फायदा उठाने वाले पंकज मारू के बारे में कई और जानकारियां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। 8 जनवरी को पीपुल्स समाचार में छपी खबर ‘पीएमओ को शिकायत: 63 संस्थाओं से छीनकर समाजसेवी मारू की संस्था से कराया जा रहा काम,’ में उसकी कारगुजारियों को उजागर किया था।

खबर छपते ही मारू ने 8 जनवरी को रिहेबलिटेशन काउंसिल आॅफ इंडिया (आरसीआई) की साइट पर रजिस्ट्रेशन डलवाया। यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय न्यास के चेयरपर्सन पद के लिए जरूरी होता है। इसके लिए आज 10 जनवरी को इंटरव्यू होने हैं। आरसीआई का सदस्य होने और विभाग के मंत्री के नाम पर दबाव डाल मारू ने साइट पर अपना फर्जी रजिस्ट्रेशन तो डलवा दिया, लेकिन क्वालिफिकेशन पूरी नहीं होने के कारण उस खंड को खाली छोड़ दिया। 8 समितियों में सदस्य मारू का नागदा में विकलांग केंद्र है।

मंत्री के कारण मिलीं बड़ी जिम्मेदारियां

केंद्र में जब से भाजपा सरकार बनी है, तब से आज तक पंकज मारू को कई बड़ी योजनाओं का पूरा लाभ मालवा अंचल से आने वाले इन केंद्रीय मंत्री ने दिया है। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन विकलांगजन सशक्तीकरण विभाग की आधा दर्जन से अधिक जन समितियों में देशभर से चयनित उम्मीदवारों को चुनना होता है। इनमें बिना नियमों का पालन किए इन्हें सदस्य बना दिया गया। वह जिम्मेदारी दी गई, जहां पैसा होता है। ग्रांट और पर्चेजिंग की जिम्मेदारी दी गई। विकलांगों के उपकरण बनाने और खरीदने वाले एलएम्को की यूनिट में भी मेंबर बनाया गया है।

अपात्र होकर भी बना हुआ है

पात्र पंकज मारू ने डिप्लोमा इन कम्युनिटी बेस रिहेबलिटेशन 2005-06 में पत्राचार से बेंगलुरू यूनिविर्सिटी से किया था। इस डिप्लोमाधारियों को हर 5 साल में रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना होता है। यह रिन्युअल इन्होंने नहीं कराया। इससे अब यह अपात्र हो जाते हैं। इसके अलावा आरसीआई इसी डिप्लोमा को करने वाले 500 से अधिक छात्रों को तो रजिस्ट्रेशन नहीं दे रहा, फिर अकेले इनका ही रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ। साफ है कि यह आरसीआई का स्वयं सदस्य होने और मंत्री के करीबी होने की धौंस दे इन्होंने फर्जी रजिस्ट्रेशन साइट पर डलवाया है।

इंजीनियरिंग डिग्रीधारी विकलांगता विशेषज्ञ कैसे?

सवाल है कि इंजीनियरिंग के डिग्रीधारी मारू को विकलांगता विशेषज्ञ न होने के बावजूद इतने अहम पदों पर जिम्मेदारी कैसे मिली? साफ है, केंद्रीय मंत्री की मेहरबानी से। मारू ने एक साल का पत्राचार कोर्स कर अहम पद लिया। राजनीतिक पहुंच के चलते और स्वयं सदस्य होने के कारण वह दबाव बना रिहेबिलिटेशन काउंसिल आॅफ इंडिया में पात्र बने हैं। चर्चा है कि मंत्री के कहने पर वह यूजीसी के मेंबर बनाए गए।

खुद ही बन गए ट्रस्ट के एंबेसेडर : आधा दर्जन से ज्यादा बोर्ड और कमेटी में विभिन्न पदों पर आसीन मारू निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना में खुद को एंबेसेडर बता रहे हैं। उन्हें न तो कोई नियुक्ति पत्र मिला और न ही कोई आदेश जारी हुआ है।

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